अस्पताल की दीवारों के बीच : मानवता बड़ा धर्म है...

 पात्र:

१-सूत्रधार

२-रामू (मानसिक रूप से अस्वस्थ असहाय व्यक्ति)

३-शंभू (सफाई कर्मचारी)

४-रवि (तीमारदार)

५-नर्स सीमा

६-अधीक्षक डॉ. वर्मा


दृश्य 1 – अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड

(एक व्यक्ति फर्श के पास बैठा है। उसके कपड़े अस्त-व्यस्त हैं। वह घबराया हुआ है और धीरे-धीरे खुद से कुछ बड़बड़ा रहा है। आसपास लोग आते-जाते हैं।)


सूत्रधार :

अस्पताल... एक ऐसी जगह, जहाँ इंसान दर्द लेकर आता है और उम्मीद लेकर लौटने की कोशिश करता है। लेकिन क्या हो, जब इलाज की जगह अपमान मिल जाए?

रामू :

(डरे हुए स्वर में) मुझे... पानी चाहिए... कोई है क्या ?

(तभी सफाई कर्मचारी शंभू गुस्से में आता है।)

शंभू :

अरे! कितनी बार कहा यहाँ मत बैठा कर! उठ... उठ यहाँ से!

रामू :

भैया... मुझे डर लग रहा है...

शंभू :

(गुस्से में) नाटक मत कर !

(शंभू उसे धक्का देता है और मारने की कोशिश करता है।)

रामू :

(सिसकते हुए) मैंने क्या किया...?


दृश्य 2 – एक तीमारदार सब देख रहा है।

रवि :

अरे भाई! ये क्या कर रहे हो ? ये अस्पताल है या कोई सजा देने की जगह ?

शंभू :

तुम अपना काम करो, बीच में मत पड़ो !

रवि :

बीच में कैसे न पड़ूँ ? ये इंसान है, कोई सामान नहीं।

(रवि मोबाइल निकालकर वीडियो रिकॉर्ड करने लगता है। आसपास लोग इकट्ठा होने लगते हैं।)

भीड़ में से आवाज :

हाँ, बिल्कुल गलत हो रहा है !


दृश्य 3 – नर्स वहाँ पहुँचती है।

नर्स सीमा :

यहाँ क्या हो रहा है ?

रवि :

मैडम, ये व्यक्ति असहाय है और इसके साथ मारपीट हो रही थी।

नर्स सीमा :

(गंभीर होकर) अस्पताल में मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता।



दृश्य 4 – अधीक्षक कार्यालय

(डॉ. वर्मा वीडियो देखते हुए गंभीर बैठे हैं।)

डॉ. वर्मा :

जिस जगह सेवा होनी चाहिए, वहाँ अगर क्रूरता दिखाई जाए, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, पूरे सिस्टम की विफलता है।

नर्स सीमा :

सर, लोग काफी नाराज़ हैं।

डॉ. वर्मा :

जांच तुरंत शुरू की जाए। दोषी कोई भी हो, कार्रवाई होगी। अस्पताल में आने वाला हर व्यक्ति सम्मान का हकदार है।


अंतिम दृश्य

(रामू एक बेंच पर बैठा है। एक नर्स उसे पानी देती है।)

सूत्रधार :

बीमार शरीर का इलाज दवाइयों से हो सकता है, लेकिन घायल इंसानियत का इलाज सिर्फ संवेदनशीलता से होता है।

किसी की मजबूरी, उसकी गलती नहीं होती।

क्योंकि इंसान की पहचान उसके पद से नहीं, उसके व्यवहार से होती है।


स्क्रीन पर संदेश :

"मानवता सबसे बड़ा धर्म है।"


~A K Singh

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